जीवन मुक्तक(1)

By kum123ar, January 28, 2018

**धरती देखी,अम्बर देखा, देख चुका मैं अंतर्मन,**
*जन्म भी देखा,मृत्यु भी देखी, देख चुका मैं हर दर्पण,*
*एक पवन उस अम्बर से इस धरती तक ही पहुंचती है,*
*खाली-खाली लगे है हर पल, सूना-सूना लगे जीवन।*
*”~~कुमार रंजीत~~”!!®!!*
(8726240091)

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