साथ "तुमने न निभाया"!

By kum123ar, February 25, 2018

कभी सर पर मेरे जादू तेरी नजरों का डोले है,
न जानें क्यों पवन में आज ले रहा मन हिचकोले है।
न भटका था,न भटका हूँ, न भटका ही मैं रहूँगा,
कि मौसम आज ये मेरे पट अंतर्मन के खोले है।

तेरी नजरों ने हमें मारा था तेरी मुस्कान पे वारे थे,
तेरी जुल्फों के वो जलवे तो दुनिया से ही निराले थे।
घायल हम हुए तेरी कातिलाना अदाओं पर,

क्योंकि तब तुम भी कुवांरी थी,क्योंकि तब हम कुँवारे थे।।

पहले सुन्दर जनम पाया,फिर यूं तुमको हमने पाया,                                                                          जैसे तुम रूह थी मेरी और मैं उस रूह का शाया।
रास्ते तक रहीं नजरें तेरे दीदार को दिलबर,
कभी तुम साथ न आयी,साथ तुमने न निभाया,
कभी तुम साथ न आयी,साथ तुमने न निभाया……..

क्यों साथ तुमने न निभाया,….!!!.

आखिर क्यों साथ तुमने न निभाया,….!!!

“~~कुमार रंजीत~~”!!®!!..
(8726240991)

2 Comments

  1. uma yadav says:

    ati sunder…man ko chu liya….

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