Hello world!

April 24, 2018

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साथ "तुमने न निभाया"!

February 25, 2018

कभी सर पर मेरे जादू तेरी नजरों का डोले है, न जानें क्यों पवन में आज ले रहा मन हिचकोले है। न भटका था,न भटका हूँ, न भटका ही मैं रहूँगा, कि मौसम आज ये मेरे पट अंतर्मन के खोले है।। तेरी नजरों ने हमें मारा था तेरी मुस्कान पे वारे थे, तेरी जुल्फों के […]

साथ "तुमने न निभाया"!

February 25, 2018

कभी सर पर मेरे जादू तेरी नजरों का डोले है, न जानें क्यों पवन में आज ले रहा मन हिचकोले है। न भटका था,न भटका हूँ, न भटका ही मैं रहूँगा, कि मौसम आज ये मेरे पट अंतर्मन के खोले है।। तेरी नजरों ने हमें मारा था तेरी मुस्कान पे वारे थे, तेरी जुल्फों के […]

जीवन दर्पण(1)

February 12, 2018

Good

जीवन मुक्तक(1)

January 28, 2018

**धरती देखी,अम्बर देखा, देख चुका मैं अंतर्मन,** *जन्म भी देखा,मृत्यु भी देखी, देख चुका मैं हर दर्पण,* *एक पवन उस अम्बर से इस धरती तक ही पहुंचती है,* *खाली-खाली लगे है हर पल, सूना-सूना लगे जीवन।* *”~~कुमार रंजीत~~”!!®!!* (8726240091)

भटकता मन, भटकता जीवन!

January 15, 2018

न जानूं मैं कैसे, परेशान किससे? जानता मैं हूँ सब कुछ, फिर अंजान किससे? हूँ न रज भी मैं पैरों की यहाँ पर किसीके, रखता हूँ फिर भी कितना मैं अभिमान किसपे?? फिर भी न जाने क्यों? कहाँ ?? और कैसे ??? भटक मैं रहा हूँ?…..भटक मैं रहा हूँ??… सच में मैं भटक रहा हूँ!!!!.. […]

26 जनवरी के प्रति / विमल राजस्थानी

January 5, 2018

जब न आयी थी तुम हम बहुत शाद थे बात यह थी अलग हम न आज़ाद थे (1) हमने खायी बहुत घास की रोटियाँ भाल हरदम तना का तना ही रहा किन्तु पाकर तुम्हें चाँदनी कब मिली जिन्दगी में अँधेरा बना ही रहा (2) जब न आजाद थे, हम बहुत शाद थे इस कदर तो […]

2018(12:01AM)

December 31, 2017

आज खुशियाँ मनाओ तुम, ख़ुशी से नाचो-गाओ तुम, कोई ऊँचा हो या नीचा हो, गले सबको लगाओ तुम। बहुत सुन्दर जनम पाया, धरम अपना निभाओ तुम, भँवर अब हम बन जाते हैं, फूल बनके दिखलाओ तुम।। “~~कुमार रंजीत~~””!!®!!..

"मुश्किल है अपना मेल प्रिये"

December 31, 2017

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये । तुम एम. ए. फ़र्स्ट डिवीजन हो, मैं हुआ मैट्रिक फ़ेल प्रिये । मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये । तुम फौजी अफ़्सर की बेटी, मैं तो किसान का बेटा हूँ । तुम रबडी खीर मलाई हो, मैं सत्तू […]

"संकल्प और भटकता मन"(भाग 1)..

December 31, 2017

बड़े दिनों के बाद भी लगता न आजादी पाई है, कभी कर्म ने कभी धर्म ने हम पर धाक जमाई है। आज जिधर देखो उधर अन्याय का राज ही चलता है नहीं समझ आता अहिंसा,अन्याय कहाँ पर पलता है, न जाने नफरत की किसने आग यहाँ पर लगायी है, बीच भंवर में फसके कहते ये […]

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